नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय नागरिक

नोबेल पुरस्कार हर वर्ष उन लोगों और संस्थाओं को प्रदान की जाती है जिन्होंने रसायनशास्त्र, भौतिकीशास्त्र, साहित्य, शांति, एवं चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया हो। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1968 से की गई।

☛ प्रत्येक पुरस्कार एक अलग समिति द्वारा प्रदान किया जाता है। द रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस भौतिकी, अर्थशास्त्र और रसायनशास्त्र में, कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट औषधी के क्षेत्र में, नॉर्वेजियन नोबेल समिति शांति के क्षेत्र में पुरस्कार प्रदान करती है।

☛ प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक मेडल, एक डिप्लोमा, एक मोनेटरी एवार्ड प्रदान की जाती है। पुरस्कार स्टॉकहोम में 10 दिसम्बर को आयोजित एक समारोह में प्रदान किया जाता है। 10 दिसम्बर को ही अल्फ्रेड नोबेल का निधन हुआ था।

☛ पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में रेड क्रॉस के संस्थापक ज्यां हैरी दुनांत और फ़्रेंच पीस सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष फ्रेडरिक पैसी को संयुक्त रूप से दिया गया।

☛ पहली महिला नोबेल पुरस्कार विजेता मेरी क्यूरी थी, जिन्होंने 1903 में भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

अब तक 5 भारतीय नागरिकों तथा 4 भारतीय मूल के नागरिकों को नोबल पुरस्कार दिया जा चुका है।

रबिन्द्रनाथ टैगोर (1913)

भारत के प्रसिद्ध कवि, संगीतकार और चित्रकार रबिन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 1913 में साहित्य के नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उस समय वे यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले गैर यूरोपीय व्यक्ति थे। इसके अलावा उन्हें बर्ड ऑफ बंगाल और गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। उनके द्वारा रचित ‘गीतांजली’, ‘राष्ट्रवाद’ तथा ‘गोरा’ आदि पुस्तकें आज भी लोगों के बीच अत्यधिक प्रसिद्ध हैं। वे एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने दो देशों (भारत और बांग्लादेश) के लिए राष्ट्रगान लिखा।

सी वी रमन (1930) 

भारत के महान वैज्ञानिक सी वी रमन को भौतिकी के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के कारण (“प्रकाश के प्रकीर्णन और उसके प्रभाव की खोज”) के लिये वर्ष 1930 में भौतिकी का नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्होंने अपने शोध द्वारा यह सिद्ध किया था कि प्रकाश के पारदर्शी माध्यम से गुजरने पर उसकी तरंगों की लम्बाई में परिवर्तन आता है। इस शोध को आगे चलकर रमन इफ़ेक्ट के नाम से जाना गया।

मदर टेरेसा (1979) 

विश्व भर में प्रेम और सेवा भाव का प्रसार करने वाली समाजसेवी मदर टेरेसा को पीड़ितों तथा निराश्रितों की सहायता करने हेतु वर्ष 1979 में नोबल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया। मदर टेरेसा का जन्म मकदूनिया (मैसिडोनिया) में हुआ था, 19 वर्ष की आयु में वह भारत चली आयीं। उन्होंने भारत में अपने जीवन के बाकी हिस्से को रोमन कैथोलिक नन के रूप में गरीबों और असहायों की मदद करने में व्यतीत कर दिया। उनके मानवीय कार्यों ने उन्हें मिशनरी ऑफ चैरिटी की स्थापना करने के लिये प्रेरित किया। गरीब और असहायों की मदद करने वाले एक मसीहा के रूप में विश्व भर में उनकी काफी सराहना की गयी। उनकी मृत्यु के 19 साल बाद 2016 में उन्हें रोमन चर्च द्वारा संत की उपाधि से विभूषित किया गया था। उनकी संस्था मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी आज भी इसी काम में जुटी है।

अमर्त्य सेन (1998)

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अपना कल्याणकारी योगदान देने के लिये अमर्त्य सेन को 1998 में आर्थिक विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मानिकगंज (ब्रिटिश भारत) में जन्मे सेन ने अर्थशास्त्र में अपनी शिक्षा ग्रहण की और इस विषय को अमेरिका तथा ब्रिटेन दोनों देशों के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाया। अर्थशास्त्र और सामाजिक न्याय, अकालों के सिद्धांतों और कल्याणकारी अर्थशास्त्र पर किये गये उनके शोध के कारण 1998 में उन्हें नोबेल पुरस्कार सहित कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘द आरग्यूमेंटेटिव इंडियन’ के लिए वे काफी चर्चित रहे लेकिन अर्थशास्त्र में उनका काम उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने विश्व को असमानता पर सिद्धांत से जागरुक करवाया तथा बताया कि भारत और चीन में महिलाओं के अपेक्षा पुरुषों की संख्या ज्यादा क्यों है। साथ ही उन्होंने इस पर भी प्रकाश डाला कि पश्चिमी देशों में मृत्यु दर में कमी के क्या कारण हैं।

कैलाश सत्यार्थी (2014)

बच्चों के अधिकारों के हक में तथा बाल मजदूरी के खिलाफ विश्वव्यापी आंदोलन चला रहे समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी को वर्ष 2014 नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने पाकिस्तान के मलाला यूसुफजई के साथ इस नोबेल शांति पुरस्कार 2014, को सहभाजित किया। वे ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ तथा ‘ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर’ नामक संस्थाओं द्वारा अभियान चलाते हैं। इस संस्था द्वारा बच्चों को मजदूरी से छुडवाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाता है।

भारतीय मूल के चार विजेता जिन्हें नोबल पुरस्कार मिला

हरगोबिन्द खुराना (1968)

भारतीय मूल के अमेरिकी जैव रसायनज्ञ हर गोबिंद खुराना को मार्शल डब्ल्यू नीरेनबर्ग और रॉबर्ट डब्ल्यू होल्ली के साथ, “प्रोटीन संश्लेषण में आनुवांशिक कोड की व्याख्या और उसके कार्य के लिए” 1968 में फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। तीनों ने इस शोध से यह स्पष्ट कर दिया कि न्यूक्लिक एसिड में उपस्थित न्यूक्लियोटाइड, कोशिका के आनुवंशिक कोड के वाहक के रूप में कार्य करना, कोशिकाओं द्वारा प्रोटीन के संश्लेषण की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। अथार्त उनके द्वारा किये गये शोध में यह बताया गया कि एंटी बायोटिक्स लेने पर इसका शरीर पर किस प्रकार प्रभाव होता है। भारत में पंजाब में जन्मे खुराना ने अमेरिका के एमआईटी संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वहीँ नागरिकता प्राप्त की।

सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर (1983)

सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर को 1983 में भौतिकी में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. चंद्रशेखर ने पूर्णतः गणितीय गणनाओं और समीकरणों के आधार पर `चंद्रशेखर सीमा’ का विवेचन किया तथा सभी खगोल वैज्ञानिकों ने पाया कि सभी श्वेत वामन तारों का द्रव्यमान चंद्रशेखर द्वारा निर्धारित सीमा में ही सीमित रहता है। नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन के भतीजे सुब्रमण्यन चंद्रशेखर का भारत में जन्म हुआ लेकिन बाद में वह अमेरिका चले गये थे।

वेंकट रामाकृष्णन (2009)

मदुरै में जन्मे भारतीय मूल के वेंकट रामाकृष्णन को 2009 में राइबोसोम के स्ट्रक्चर और कार्यप्रणाली के क्षेत्र में शोध के लिए केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार दिया गया। वे कैम्ब्रिज विश्विद्यालय में अध्यापन करते हैं तथा वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन करते हैं। वह वर्तमान में रॉयल सोसाइटी (लंदन) के अध्यक्ष हैं।

वी एस नायपॉल (2001)

विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल को 2001 में साहित्य के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में ‘हाउस ऑफ़ मिस्टर बिस्वास’, इन अ फ्री स्टेट, अ बेंड इन द रिवर आदि शामिल हैं। त्रिनिदाद एंड टोबैगो में जन्मे नायपॉल के पूर्वज भारत में गोरखपुर के रहने वाले थे। नायपॉल ने 30 से अधिक पुस्तकों की रचना की। 2001 में उनको “कामों में एकजुट कथा और अविनाशी जांच करने के लिए जो हमें दबाए इतिहास की उपस्थिति देखने के लिए मजबूर करता है” के लिये साहित्य नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

कुछ अन्य भारत से संबंध रखने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता

रोनाल्ड रॉस

फिजियोलॉजी या चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार 1902 सर रोनाल्ड रॉस का जन्म ब्रिटिश-भारत का हिस्सा अल्मोड़ा में हुआ था और उन्होंने 25 सालों तक भारतीय चिकित्सा सेवा के साथ काम किया। सर रॉस ने मच्छरों द्वारा मलेरिया परजीवी के संचरण को साबित करने वाली अपनी खोज के साथ हमें मलेरिया (जो उस समय काफी घातक था) से निपटने और उस पर विजय प्राप्त करने में सक्षम बनाया।

रूडयार्ड किपलिंग

प्रसिद्ध कवि और लेखक रुडयार्ड किपलिंग का जन्म बॉम्बे (ब्रिटिश भारत) में हुआ था। जहाँ उनका जन्म हुआ उस देश (भारत) से उनको असीम प्रेम था। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने भारत में अपने अनुभवों जैसे द जंगल बुक जैसे कई कार्य किये। 1907 में उन्हें साहित्य में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

14 वें दलाई लामा –

14 वें तेनेजिन ग्यात्सो, वर्तमान में दलाई लामा को “तिब्बत की मुक्ति के संघर्ष और शांतिपूर्ण समाधान के प्रयास” के लिये 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। दलाई लामा शांति और सामंजस्य का चेहरा बन गए हैं, जो दुनिया भर में तिब्बत के मुद्दे के बारे में उनकी प्रतिबद्धता के लिए खड़े हुए हैं।

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Author: R.S.Rajawat

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